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डुमस बीच (ख़मोश खौफ़ की रात )

यह कहानी गुजरात से सुरत 21 किलोमीटर दूर डुमस बीच की है, कहते है । सालो पहले यहाँ आत्माओ ने वास कर लिया था । इसलिए वहाँ की रेत काली हैं । डुमस बीच की दूसरी तरफ श्मशान भी है । ओर

कहते है । वहाँ किसी के रोने की कुत्तो की भोकने की अजीब अजीब सी आवाज़े आती है । गुजरात मै, घुमने आयी दो लङकीयो की जो सुनसान बीच पर फँस गई थी । मै इस कहानी मैं बताने जा रहा हूँ ।

(मुंबई से श्री कुमार की दो पुत्रीयाँ शर्मनी अज़ाला गुजरात गर्मी की छुट्टीयो मे अपनी मौसी के यहाँ आयी हुई थी । फोन पर उनके पिता श्री कुमार जी ने आने की उन्को सुचना दे दी थी । की उन्की दो पुत्रीयाँ वहाँ आने वाली है ।वो वहा सुचना पा कर बहुत प्रसन्न हुए

यह सुनकर की

उनकी भतीजीयाँ आने वाली है । शाम को करीब 6:00 घर की बैल बजती है ।

ओर घर का दरवाज़ा खुलता है ।

शर्मनी, अज़ाला, का घर मे प्रवेश होता है, शर्मनी दुर्गा माँ की भक्त है ।

गले मे लम्बी सी रूद्राक्ष की माला ओर बङा सा माथे पर तिलक ओर हाथ मे छोटी सी रूद्राक्ष की माला......भगवान् का ध्यान करते हुए......राम राम राम....ओर अज़ाला वो ही मार्डन अंदाज मैं वह मानती है ।भगवान को जनना है । तो माडर्न अवतार ही सही है । वह दोनो को देखकर बहुत

खुश होते है । वह दोनो सबको प्रणाम हाय, हैलो करती है । फिर दोनो हाथ मुँह दोनो चले जाते है । नोकर उन्का समान जिसका नाम राम प्रसाद हैं । उन दोनो का समान उपर कमरे मे रख देता है ।

वह हाथ मुँह धोकर आते है । खाने की टेबल पर दोनो खाना खाने सबके साथ मैं बैठती है । अज़ाला से उसकी बङी मोसी (मुस्कुराते हुए पूछती है) खाना खाते हुए,


बङी मोसी - अज़ाला यह बताओ , आगे का क्या सोचा हैं । तुमने, शादी करनी है ।या आगे पढ़ाई करके कुछ करना है ।


अज़ाला - ये कैसा सवाल है । बड़ी मोसी शादी , शादी तो वो लोग करते है । मोसी जो जिदगीं से हार मानते है । जीत सिर्फ उनको मिलती है। जिसके पास जिंदगी जीने का हुनर होता है ।


(अपनी बङी मोसी अपनी मम्मी की मुहँ तरफ करके बात करती है । ओर कहती है ।


बङी मोसी - व सच कहा तुमने, अज़ाला जीना वही जानता है । जिसके पास जीने का हुनर होता है । आज तक हम समझा नहीं पाये हम अपने परिवार को शायद कुछ तुम्हारी बात सुनकर सबको समझ आ जाये, तुम भी मेरी तरह हो अज़ाला तुम भी मेरी तरह सोचती हो सच मे


( उदास भरी अहा भरते हुए, बड़ी मोसी शर्मनी से पूछती है ।


बड़ी मोसी - ओर तुम शर्मनी


शर्मनी - मैं वही करना चाहूंगी जो मेरी दुर्गा मां चहेगीं, अगर लोग बिना शादी के रहने लगे, तो दुनिया मैं कोई देवी माँ को नहीं पैसो की पूजा करेगा, संसार में कुछ ऐसे भी लोग है । जो पैसो को भगवान समझते है ।

जो देता है । हमको ऐशो-आराम हमे तो हम उस भगवान को याद करना भूल जाते है ।


बड़ी मोसी - तुम्हारी बात भी सही है ।शर्मनी पर पैसा न हो तो जिंदगी बियाबान लगती है । अज़ाला इक तरफ से सही भी हैं । न हो किसी के पास पैसा तो हरे - भरे घर भी वीरान लगते है ।



30. Januar 2022 16:05:50 0 Bericht Einbetten Follow einer Story
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